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श्री तुलजा भवानी मंदिर के दिव्य क्षणों, समारोहों और वास्तुशिल्प चमत्कारों का साक्षी बनें।

।। शेषशाही अलंकार महापूजा ।।

श्री तुलजा भवानी माता के नवरात्रि उत्सव के दौरान, धार्मिक स्थिति के अनुसार विभिन्न प्रकार की पूजा की जाती है।

।। श्री तुलजाभवानी माता नवरात्रि उत्सव ।। दिनांक ११ अक्टूबर २०२६ से १४ अक्टूबर २०२६ तक चलने वाले इस पावन नवरात्रि पर्व के दौरान, श्री तुलजाभवानी मंदिर में प्रतिदिन प्रातः माता की अभिषेक पूजा, धूपारती और नैवेद्य सेवा संपन्न होती है। इसके पश्चात, पारंपरिक विधि से देवी के मुख्य घट को पान के पत्तों और ताजे फूलों की पवित्र माला अर्पित की जाती है। इस मंगल अवधि में प्रतिदिन रात्रि के समय माता का भव्य 'छबीना उत्सव' मनाया जाता है और सभी दैनिक धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण आस्था के साथ संपन्न होते हैं। माता जगदम्बा के इस पवित्र नवरात्रि महोत्सव में दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालु श्रीक्षेत्र तुलजापुर में बड़ी श्रद्धा के साथ आते हैं।

।। श्री तुलजाभवानी माता नवरात्रि उत्सव घटस्थापना ।। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर, दिनांक ११ अक्टूबर २०२६ को दोपहर ठीक १२:०० बजे श्री तुलजाभवानी मंदिर में अत्यंत भक्तिभाव और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ 'घटस्थापना' अनुष्ठान संपन्न होगा। इस पवित्र अनुष्ठान में पारंपरिक रूप से मंदिर के मुख्य गर्भगृह के सामने स्थित 'सिंह गर्भगृह' (सिंह गाभारा) में एक नए वस्त्र पर पत्रावली (पत्तों की थाली) रखकर उस पर पवित्र मिट्टी सजाई जाती है। फिर उसमें सप्त धान्य (सात प्रकार के अनाज) बोए जाते हैं और विधिपूर्वक मिट्टी के कलश की स्थापना की जाती है। इस मंगल कलश के समीप ही माता की निरंतर उपासना का प्रतीक 'अखंड नंदादीप' प्रज्वलित किया जाएगा। नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता के दैनिक धार्मिक विधी और कुलाचार संपन्न होंगे। माता जगदम्बा के इस परमपवित्र नवरात्रि महोत्सव में दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पूरे देश से श्रीक्षेत्र तुलजापुर में आते हैं।

श्री तुलजाभवानी माता को ग्रहण काल में पूजा-अर्चना करने की विधि और फोटो

नवरात्रि के त्योहार के दौरान, देवी तुलजाभवानी की पूजा उनके धार्मिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग रूपों में की जाती है।

श्री तुलजाभवानी माता की ललिता पंचमी के अवसर पर रथ अलंकार महापूजा ।

।। मुरली अलंकार महापूजा ।।


नवरात्रि के त्योहार के दौरान, श्री तुलजा भवानी माता की पूजा धार्मिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग रूपों में की जाती है।


।। श्री तुलजाभवानी माता का मंचकी निद्रा दर्शन ।। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर दिनांक ३ अक्टूबर २०२६ की संध्या से श्री तुलजाभवानी माता का 'मंचकी निद्रा' (शयन मुद्रा) काल आरंभ हो रहा है। यह अत्यंत पवित्र अनुष्ठान धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूर्ण आस्था के साथ संपन्न होगा। मंचकी निद्रा का यह काल दिनांक १० अक्टूबर २०२६ की रात्रि तक रहेगा। इस विशेष अवधि में भक्तों के लिए माता का दर्शन प्रातः ४:०० बजे से रात १०:०० बजे तक खुला रहेगा। (नोट: प्रशासन द्वारा दर्शन के समय में बदलाव किया जा सकता है।) मंचकी निद्रा के दौरान, मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार कुछ दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों में बदलाव होता है और देवी को विशेष रूप से 'सुवासित तेल अभिषेक' (सुगंधित तेल से स्नान) अर्पित किया जाता है। माता जगदम्बा के इस दुर्लभ और अलौकिक 'मंचकी निद्रा दर्शन' का पुण्य लाभ प्राप्त करने हेतु हजारों श्रद्धालु इस दौरान तुलजापुर आते हैं।

नवरात्रि के त्योहार के दौरान, श्री तुलजा भवानी माता की पूजा धार्मिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग रूपों में की जाती है।

श्री तुलजा भवानी माता की गर्मी के मौसम में पंखे से हवा चलाने की पारंपरिक सेवा।